भारतीय वायु सेना दिवस विशेष : आगरा में है एशिया का सबसे बड़ा एयरबेस

आगरा। 8 अक्टूबर का दिन भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। आज ही के भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी। भारतीय वायुसेना अपनी 87 वी वर्षगाँठ को बड़े ही हर्षो उल्लास के साथ मना रहा है। भारतीय वायुसेना में आगरा के एयरबेस भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

भारतीय वायु सेना का आगरा एयरबेस किस तरह खास है और उसके पास क्या क्या उपलब्धि है और कैसे वो लगातार मजबूत हो रहा है इसकी जानकारी वायुसेना के अधिकारियों ने दी।

वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक इस एयरबेस को सेकेंड वर्ल्ड वॉर में अमेरिका के लिए तैयार किया गया था। 1942 में जापान से लड़ने के लिए अमेरिकी विमान इस एयरपोर्ट का इस्‍तेमाल सप्‍लाई और मेंटेनेंस के लिए करते थे। उस वक्त इस एयरबेस का नाम ‘आगरा एयरड्रॉप’ था।

भारतीय एयरफोर्स का आगरा एयरबेस एशिया में सबसे बड़ा है। इसमें 250 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 5 हजार कर्मचारी तैनात हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस एयरबेस से कई महत्वपूर्ण कार्यो को अंजाम दिया गया है। बताया जाता है कि आजादी के बाद पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश में 4 इंटरनेशनल लेवल के एयरबेस की स्थापना की थी। इसमें आगरा एयरबेस चौथे विंग के रूप में था। इसके बाद यहां डेवलपमेंट का काम शुरू हुआ। आज यह एशिया का सबसे विशाल एयरबेस बन चुका है।

आगरा एयरबेस पर आईएल-76, एएन-32, सी-17, सी-124 जहाजों का बेड़ा है। यहां विमान पर अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल (अवॉक्‍स) भी तैनात हैं। इनकी खासियत है कि यह आसमान में 400 किमी दूर तक की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। पाकिस्‍तान हो या चीन, भारत में रहकर ही इनकी हवाई निगरानी की जा रही है।

आपातकालीन स्थिति में अगर कभी एयरपोर्ट पर खतरे की स्थिति दिखती है तो अब एक्‍सप्रेस-वे को लड़ाकू विमानों के उतरने लायक बनाया गया है। यदि किसी वजह से युद्ध के दौरान रनवे बंद हो जाए तो ऐसी स्थिति में विमानों को एक्सप्रेस-वे पर उतारा जा सकेगा, ताकि इसमें फ्यूल और हथियार फिर से लोड किए जा सकें। आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर इसका परीक्षण भी हो चुका है ।

आगरा एयरबेस में देश का एकमात्र पैराशूट ट्रेनिंग सेंटर (पीटीएस) है। भारत, बांग्‍लादेश, श्रीलंका समेत कई देशों के जवान यहां पर पैराशूट की सहायता से विमान से आसमान में कूदने की ट्रेनिंग लेते हैं। मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने यहां पर पैराट्रूपर बनने की ट्रेनिंग ली थी।
चीफ ट्रेनर विंग कमांडर केवीएस साम्याल ने बताया कि एक साल में करीब 13 हजार जवान यहां ट्रेनिंग के लिए आते हैं। वहीं, सालभर में 50 हजार बार जवान छलांग लगाते हैं।

चीफ ट्रेनर विंग कमांडर केवीएस साम्याल बताते हैं कि अब भारतीय जवान 40 हजार फुट की ऊंचाई से विमान से जमीन पर कूद सकते हैं। ये जवान युद्ध के स्‍थान से 40 किमी दूर विमान से छलांग लगाएंगे। खास बात यह है कि उन्‍हें रडार नहीं पकड़ सकता है। यही नहीं, रात में इन जवानों को कोई देख भी नहीं सकता है। इनके पास ऑक्‍सीजन सिलेंडर, हथियार और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्‍टम होता है।

यही नही आगरा एयरबेस सुरक्षा की दृष्टि से भी चाक चौंबन्द है। स्टेशन कामण्डर के अनुसार आगरा एयरबेस लगातार ऊंचाइयों को छू रहा है। यंहा इंटरनेशल लेवल की ट्रेनिंग जवानों को दी जा रही है। तकनीकी की क्षेत्र मे भी हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

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