जहाँ-जहाँ पैर पड़े संतन के वहां-वहां बंटाधार – नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी

आगरा। कांग्रेस पार्टी की ओर से आयोजित रोजा इफ़्तार में आए पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने प्रदेश व केंद्र सरकार पर भाई चारा खत्म करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश और प्रदेश में ऐसी परिस्थितियां पैदा की जा रही है जिसमें लोगों को जातिवाद धर्म के नाम पर एक दूसरे से दूर किया जा रहा है। जबकि सरकार पिछले 4 वर्षों में विकास कार्य में पूरी तरह से विफल रही। ना ही रोजगार मिला और ना ही कोई नया निवेश हुआ। अब इन कमियों को छुपाने के लिए जातिवाद का सहारा लिया जा रहा है।

पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन ने एक कहावत के माध्यम से प्रदेश और केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए जुमला कसा कि जहां जहां पैर पड़े संतन के वहां वहां बंटाधार। इतना ही नहीं भाजपा के बलिया विधायक के ताजमहल पर आये बयान पर विधायक को भी आड़े हाथ लिया उनका कहना था कि विनाश काले विपरीत बुद्धि।

हाल ही में उपचुनाव में जिस तरह से महागठबंधन को जीत हासिल हुई उससे भी सिद्दीकी काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। हालांकि महागठबंधन की क्या शक्ल होगी। कौन-कौन इसमें शामिल होगा और कांग्रेस की क्या भूमिका रहेगी इन सभी सवालों का जवाब देने से बचते ही रहे। उन्होंने कहा कि अभी इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। चर्चाएं व विचार-विमर्श सभी पार्टियों में चल रहा है।

हाल ही में सुर्खियों में रहे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी बंगले को खाली करने और उसके बाद बंगले में आई टूट-फूट की तस्वीरें पर सिद्दीकी ने कहा कि यह देखना समझ से बाहर है कि आखिर यह किसने किया है। उन्होंने कहा कि जब सरकार पूरे प्रदेश को ही तहस-नहस कर रही है तो 1 बंगले को तहस-नहस करना कौन सी बड़ी बात है।

वहीं पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की तबीयत जल्द से जल्द सही होने की दुआ करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि उनका हाल-चाल जानने में सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एम्स पहुंचे जो कि यह दर्शाता है कि कांग्रेस आपसी राजनीति से ऊपर उठकर काम करने वाली पार्टी है।

नसीमुद्दीन सिद्की का कहना था कि रोजा इफ्तार आपसी भाईचारे का प्रतीक है और इन दावतों में सभी धर्मों के लोग एक साथ बैठते हैं जो कि भारतीय संस्कृति और गंगा जमुनी तहजीब का एक उदाहरण है। साथ ही उन्होंने नाराजगी जताई कि पूर्व की सरकारों में शहरों में तमाम अधिकारी व विभाग भी रोजा इफ़्तार कराया करते थे लेकिन अब यह सिलसिला पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। जो कि कहीं ना कहीं आपसी भाईचारे को खत्म करने का ही एक कदम है।

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